साल 2026 की इन तिथियों में बिना मुहूर्त कर सकते हैं सभी शुभ काम
नई दिल्ली। आज से साल 2026 की शुरूआत हो रही है। 2026 में हिंदू कैलेंडर में कुछ तिथियां ऐसी होती हैं जो अपने आप में शुभ मुहूर्त मानी जाती हैं। इन तिथियों पर आपको पंचांग और शुभ मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती। इन तिथियों पर आप आंख बंद करके कोई भी शुभ और मांगलिक काम कर सकते हैं। आइए जानते हैं कि ये शुभ तिथियां कौन-कौन सी हैं और इस नए साल 2026 में कब-कब आएंगी?
बसंत पंचमी
बसंत पंचमी का त्योहार बसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक माना जाता है। ये त्योहार हर साल माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन मनाया जाता है। नए साल पर बसंत पचमी का त्योहार इस जनवरी महीने की 23 तारीख को मनाया जाएगा। इस दिन ज्ञान, कला और संगीत की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। ये दिन विवाह समेत तमाम शुभ और मांगलिक कामों के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।
फुलेरा दूज
फाल्गुन शुक्ल की द्वितीया तिथि को होली से ठीक पहले फुलेरा दूज का त्योहार पड़ता है। इस तिथि को भी बहुत अच्छा माना जाता है। इस दिन श्रीकृष्ण और राधा रानी की पूजा की जाती है। ये दिन विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन या किसी भी अन्य शुभ काम के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। इस साल ये पर्व 19 फरवरी को मनाया जाएगा।
अक्षय तृतीया
वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से बड़ा लाभ मिलता है। कहा जाता है कि ये दिन दान-स्नान, नए कार्यों की शुरुआत या नई चीजों की खरीदारी करने के लिए बड़ा शुभ होता है। इस साल 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया मनाई जाएगी।
जानकी नवमी
हर साल वैशाख मास की नवमी तिथि के दिन जानकी नवमी मनाई जाती है। ये शुभ दिन माता सीता के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भगवान राम और माता सीता के पूजन का विधान है। मान्यता है कि इस दिन जो शुभ काम किए जाते हैं, उनके सफल होने की संभावना बहुत अधिक होती है। इस साल ये पर्व 25 अप्रैल को मनाया जाएगा।
गंगा दशहरा
ज्येष्ठ माह की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को हर साल गंगा दशहरा मनाया जाता है। ये पर्व मां गंगा के स्वर्ग से पृथ्वी पर आने का प्रतीक माना जाता है। इस दिन गंगा स्नान, दान और पूजा-पाठ से पूर्वजों की आत्मा को शांति प्राप्त होती है। ये तिथि अबूझ मुहूर्त है। यानी इस दिन कोई भी शुभ काम बिना मुहूर्त देखे किया जा सकता है। इस साल ये पर्व 25 मई को मनाया जाएगा।
भड़ली नवमी
आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को भड़ली नवमी कहा जाता है। ज्योतिषविदों के अनुसार, इस तिथि पर पंचांग देखे बिना भी लगन, विवाह, गृह प्रवेश या अन्य शुभ काम किए जा सकते हैं। इस साल भड़ली नवमी 22 जुलाई को मनाई जाएगी।
देवउठनी एकादशी
कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु चार माह की योगनिद्रा से जागते हैं। इस एकादशी को देवउठनी एकादशी कहा जाता है। इस दिन शुभ और मांगलिक कामों पर लगी पाबंदी हट जाती है। इस दिन से विवाह फिर शुरू हो जाते हैं। इस साल देवउठनी एकादशी 20 नवंबर को रहेगी।
