टोक्यो इंडस्ट्री मीट में बोले हरदीप सिंह पुरी: भारत-जापान ऊर्जा साझेदारी से खुलेगी 500 अरब डॉलर के निवेश की राह
टोक्यो -टोक्यो में आयोजित इंडस्ट्री राउंडटेबल मीटिंग में भारत के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भारत-जापान ऊर्जा सहयोग को नई दिशा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस बैठक में जापान के प्रमुख उद्योग प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया, जहां दोनों देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में दीर्घकालिक और व्यापक साझेदारी की संभावनाओं पर चर्चा की गई।
मंत्री पुरी ने कहा कि भारत की तेजी से बढ़ती ऊर्जा जरूरतें, विशाल बाजार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हुए बुनियादी ढांचा विकास के साथ जापान की तकनीकी क्षमता मिलकर एक “प्राकृतिक साझेदारी” बनाते हैं। यह साझेदारी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में ऊर्जा सुरक्षा और स्थिरता को मजबूत करेगी।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी की हालिया जापान यात्रा के दौरान दोनों देशों ने इंडिया-जापान जॉइंट विज़न फॉर नेक्स्ट डिकेड को अपनाया है। पहले 2022–2026 की अवधि में जापान द्वारा किए जा रहे JPY 5 ट्रिलियन निवेश लक्ष्य में उल्लेखनीय प्रगति के बाद अब दोनों देशों ने JPY 10 ट्रिलियन (लगभग 68 अरब डॉलर) के नए निजी निवेश का लक्ष्य तय किया है।
पुरी ने कहा कि भारत ऊर्जा क्षेत्र में 500 अरब डॉलर से अधिक के निवेश अवसर खोल रहा है, जिनमें E&P, LNG, सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन, हाइड्रोजन, शिपिंग और नई फ्यूल टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने 100% FDI, पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया और सुधार आधारित नीतियों को विदेशी निवेशकों के लिए लाभकारी बताया।

मंत्री ने यह भी कहा कि भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता है और अगले दो दशकों में वैश्विक ऊर्जा मांग में 30% से अधिक योगदान अकेले भारत द्वारा होगा। प्राकृतिक गैस नेटवर्क में 72 अरब डॉलर का निवेश तथा भविष्य के ईंधन हाइड्रोजन में सहयोग दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत करेगा।

उन्होंने मरुति-सुज़ुकी की ऐतिहासिक सफलता का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत और जापान ऊर्जा सहयोग में भी इसी तरह की नई और बड़ी सफलता कहानी लिख सकते हैं।

अंत में, पुरी ने जापानी उद्योग जगत को भारत की ऊर्जा परियोजनाओं में सक्रिय भागीदारी के लिए आमंत्रित किया और पूर्ण सरकारी समर्थन देने का आश्वासन दिया।
