तिरंगे का राजनीतिक और धार्मिक इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
- दिल्ली राष्ट्रीय
Political Trust
- July 12, 2025
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याचिका पर इस दिन सुनवाई
नई दिल्ली। तिरंगा के राजनीतिक और धार्मिक इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट सख्त हो गया है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट 14 जुलाई को एक याचिका पर सुनवाई करेगा। जिसमें राजनीतिक या धार्मिक मकसद से राष्ट्रीय ध्वज के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग की है। याचिका में केंद्र और चुनाव आयोग को निर्देश देने की अपील की गई है कि वे राष्ट्रीय सम्मान अधिनियम और ध्वज संहिता 2002 को सख्ती से लागू करें और तिरंगे की गरिमा को सुरक्षित रखें।
राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को राजनीतिक और धार्मिक मकसदों से इस्तेमाल करने पर रोक लगाने की मांग को लेकर एक अहम याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई है। इस याचिका में केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को निर्देश देने की मांग की गई है कि किसी भी राजनीतिक पार्टी या धार्मिक समूह को राष्ट्रीय ध्वज के पक्षपातपूर्ण या धार्मिक उद्देश्य के लिए उपयोग करने से रोका जाए।
याचिका 14 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट की बेंच के सामने सुनवाई के लिए पेश की जाएगी। इस बेंच में मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन और एन वी अंजारिया शामिल हैं। याचिकाकर्ता ने अदालत से अपील की है कि वह केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को स्पष्ट निर्देश दे कि वे ऐसे किसी भी प्रयास को रोकें जिसमें राष्ट्रीय ध्वज पर पार्टी का लोगो, धार्मिक चिन्ह या किसी भी तरह का पाठ जोड़ा गया हो।
तिरंगे का सम्मान बनाए रखने की अपील
याचिका में कहा गया है कि तिरंगे का राजनीतिक या धार्मिक प्रतीक के रूप में इस्तेमाल न सिर्फ संविधान की भावना के खिलाफ है, बल्कि यह राष्ट्रीय सम्मान अधिनियम, 1971 और भारतीय ध्वज संहिता, 2002 का भी उल्लंघन है। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि इन कानूनों का सख्ती से पालन कराया जाए, ताकि तिरंगे का हमेशा सम्मान बना रहे।
तिरंगे पर नहीं होने चाहिए पार्टी के निशान
याचिका में विशेष तौर पर इस बात पर जोर दिया गया है कि कोई भी राजनीतिक दल तिरंगे पर अपना पार्टी चिन्ह या धार्मिक प्रतीक नहीं लगा सकता। यह अपील तब सामने आई है जब कई बार चुनावी रैलियों, धार्मिक आयोजनों या विरोध प्रदर्शन में तिरंगे को पार्टी के प्रतीक के साथ जोड़ा गया है, जिससे उसकी गरिमा को ठेस पहुंच सकती है।
केंद्र सरकार को निर्देश देने की मांग
याचिकाकर्ता ने सर्वोच्च अदालत से अपील की है कि वह केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को निर्देश दे कि ऐसे मामलों में सख्ती से कार्रवाई की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जाए। याचिका में यह भी कहा गया है कि संबंधित संस्थाएं सुनिश्चित करें कि राष्ट्रीय ध्वज का किसी भी राजनीतिक फायदे या धार्मिक एजेंडे के लिए इस्तेमाल न किया जाए।
नई दिल्ली। तिरंगा के राजनीतिक और धार्मिक इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट सख्त हो गया है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट 14 जुलाई को एक याचिका पर सुनवाई करेगा। जिसमें राजनीतिक या धार्मिक मकसद से राष्ट्रीय ध्वज के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग की है। याचिका में केंद्र और चुनाव आयोग को निर्देश देने की अपील की गई है कि वे राष्ट्रीय सम्मान अधिनियम और ध्वज संहिता 2002 को सख्ती से लागू करें और तिरंगे की गरिमा को सुरक्षित रखें।
राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को राजनीतिक और धार्मिक मकसदों से इस्तेमाल करने पर रोक लगाने की मांग को लेकर एक अहम याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई है। इस याचिका में केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को निर्देश देने की मांग की गई है कि किसी भी राजनीतिक पार्टी या धार्मिक समूह को राष्ट्रीय ध्वज के पक्षपातपूर्ण या धार्मिक उद्देश्य के लिए उपयोग करने से रोका जाए।
याचिका 14 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट की बेंच के सामने सुनवाई के लिए पेश की जाएगी। इस बेंच में मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन और एन वी अंजारिया शामिल हैं। याचिकाकर्ता ने अदालत से अपील की है कि वह केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को स्पष्ट निर्देश दे कि वे ऐसे किसी भी प्रयास को रोकें जिसमें राष्ट्रीय ध्वज पर पार्टी का लोगो, धार्मिक चिन्ह या किसी भी तरह का पाठ जोड़ा गया हो।
तिरंगे का सम्मान बनाए रखने की अपील
याचिका में कहा गया है कि तिरंगे का राजनीतिक या धार्मिक प्रतीक के रूप में इस्तेमाल न सिर्फ संविधान की भावना के खिलाफ है, बल्कि यह राष्ट्रीय सम्मान अधिनियम, 1971 और भारतीय ध्वज संहिता, 2002 का भी उल्लंघन है। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि इन कानूनों का सख्ती से पालन कराया जाए, ताकि तिरंगे का हमेशा सम्मान बना रहे।
तिरंगे पर नहीं होने चाहिए पार्टी के निशान
याचिका में विशेष तौर पर इस बात पर जोर दिया गया है कि कोई भी राजनीतिक दल तिरंगे पर अपना पार्टी चिन्ह या धार्मिक प्रतीक नहीं लगा सकता। यह अपील तब सामने आई है जब कई बार चुनावी रैलियों, धार्मिक आयोजनों या विरोध प्रदर्शन में तिरंगे को पार्टी के प्रतीक के साथ जोड़ा गया है, जिससे उसकी गरिमा को ठेस पहुंच सकती है।
केंद्र सरकार को निर्देश देने की मांग
याचिकाकर्ता ने सर्वोच्च अदालत से अपील की है कि वह केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को निर्देश दे कि ऐसे मामलों में सख्ती से कार्रवाई की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जाए। याचिका में यह भी कहा गया है कि संबंधित संस्थाएं सुनिश्चित करें कि राष्ट्रीय ध्वज का किसी भी राजनीतिक फायदे या धार्मिक एजेंडे के लिए इस्तेमाल न किया जाए।
