संसद का बजट सत्र राष्ट्र के विकास की नई प्राथमिकताओं और विधायी सक्रियता का गवाह बना
- दिल्ली राजनीति राष्ट्रीय
Political Trust
- April 18, 2026
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Nimmi Thakur
नई दिल्ली। संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा का बजट सत्र 2026 शनिवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया। 18वीं लोकसभा का सातवां सत्र और राज्यसभा का 270वां सत्र राष्ट्र के विकास की नई प्राथमिकताओं और विधायी सक्रियता का गवाह बना। जहाँ राज्यसभा ने 109.87% की शानदार उत्पादकता दर्ज की, वहीं लोकसभा में भी 93% कार्य संपन्न हुआ।
जानिए लोकसभा में क्या हुआ
विधायी कार्यों और चर्चाओं का केंद्र लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सूचित किया कि 28 जनवरी से शुरू हुए इस सत्र के दौरान 31 बैठकें हुईं, जो लगभग 151 घंटे 42 मिनट तक चलीं। बजट के दौरान वित्त मंत्री द्वारा 1 फरवरी को पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026-27 पर 13 घंटे चर्चा हुई, जिसमें 63 सदस्यों ने भाग लिया। 18 मार्च को विनियोग विधेयक और 25 मार्च को वित्त विधेयक पारित किया गया।
9 प्रमुख विधेयक पास हुए
सत्र के दौरान 12 सरकारी विधेयक पेश किए गए, जिनमें से 9 पारित हुए। इनमें औद्योगिक संबंध संहिता (संशोधन) विधेयक, 2026, ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2026, वित्त विधेयक, 2026, दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) विधेयक, 2026, आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2026, जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) विधेयक, 2026 और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026 प्रमुख रहे। हालांकि, संविधान (131वां संशोधन) विधेयक सदन द्वारा पारित नहीं किया जा सका।
ये रही विशेष उपलब्धि
लोकसभा अध्यक्ष आंम बिरला ने भारत के 500 मेगावाट प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर द्वारा ‘प्रथम क्रिटिकैलिटी’ प्राप्त करने की ऐतिहासिक उपलब्धि की जानकारी सदन को दी।
उग्रवाद पर चर्चा
30 मार्च को देश को वामपंथी उग्रवाद से मुक्त करने पर 6 घंटे से अधिक की विशेष चर्चा हुई, जिसका समापन गृह मंत्री के उत्तर के साथ हुआ।
राज्यसभा के लिए महत्वपूर्ण रहा सत्र
राज्यसभा के सभापति ने सत्र के महत्व को रेखांकित करते हुए इसे राष्ट्र के विकास पथ का निर्धारक बताया। सदन की कार्यवाही 157 घंटे 40 मिनट चली। इस दौरान 117 प्रश्न और 446 शून्य काल के मामले उठाए गए।
कूटनीति और ऊर्जा सुरक्षा
सदन ने ‘भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते’ और ‘पश्चिम एशिया की स्थिति’ पर सरकार के वक्तव्यों का संज्ञान लिया। प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा की चुनौतियों पर राष्ट्र के सामूहिक संकल्प को रेखांकित किया।
संसदीय गौरव
हरिवंश नारायण तीसरी बार राज्यसभा के उपसभापति के रूप में पुनः निर्वाचित हुए, जिसे सभी दलों ने सराहा।
भाषाई विविधता की मिसाल
दोनों सदनों में भारत की भाषाई शक्ति का प्रदर्शन हुआ। लोकसभा में 18 भारतीय भाषाओं में 181 बयान दिए गए, जबकि राज्यसभा में 12 क्षेत्रीय भाषाओं में 94 बार सदस्यों ने अपनी बात रखी। दोनों ही सदनों में ‘सिमल्टेनियस इंटरप्रिटेशन’ (एक साथ अनुवाद) की सुविधा ने इस संवाद को सुगम बनाया।
जानिए लोकसभा में क्या हुआ
विधायी कार्यों और चर्चाओं का केंद्र लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सूचित किया कि 28 जनवरी से शुरू हुए इस सत्र के दौरान 31 बैठकें हुईं, जो लगभग 151 घंटे 42 मिनट तक चलीं। बजट के दौरान वित्त मंत्री द्वारा 1 फरवरी को पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026-27 पर 13 घंटे चर्चा हुई, जिसमें 63 सदस्यों ने भाग लिया। 18 मार्च को विनियोग विधेयक और 25 मार्च को वित्त विधेयक पारित किया गया।
9 प्रमुख विधेयक पास हुए
सत्र के दौरान 12 सरकारी विधेयक पेश किए गए, जिनमें से 9 पारित हुए। इनमें औद्योगिक संबंध संहिता (संशोधन) विधेयक, 2026, ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2026, वित्त विधेयक, 2026, दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) विधेयक, 2026, आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2026, जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) विधेयक, 2026 और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026 प्रमुख रहे। हालांकि, संविधान (131वां संशोधन) विधेयक सदन द्वारा पारित नहीं किया जा सका।
ये रही विशेष उपलब्धि
लोकसभा अध्यक्ष आंम बिरला ने भारत के 500 मेगावाट प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर द्वारा ‘प्रथम क्रिटिकैलिटी’ प्राप्त करने की ऐतिहासिक उपलब्धि की जानकारी सदन को दी।
उग्रवाद पर चर्चा
30 मार्च को देश को वामपंथी उग्रवाद से मुक्त करने पर 6 घंटे से अधिक की विशेष चर्चा हुई, जिसका समापन गृह मंत्री के उत्तर के साथ हुआ।
राज्यसभा के लिए महत्वपूर्ण रहा सत्र
राज्यसभा के सभापति ने सत्र के महत्व को रेखांकित करते हुए इसे राष्ट्र के विकास पथ का निर्धारक बताया। सदन की कार्यवाही 157 घंटे 40 मिनट चली। इस दौरान 117 प्रश्न और 446 शून्य काल के मामले उठाए गए।
कूटनीति और ऊर्जा सुरक्षा
सदन ने ‘भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते’ और ‘पश्चिम एशिया की स्थिति’ पर सरकार के वक्तव्यों का संज्ञान लिया। प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा की चुनौतियों पर राष्ट्र के सामूहिक संकल्प को रेखांकित किया।
संसदीय गौरव
हरिवंश नारायण तीसरी बार राज्यसभा के उपसभापति के रूप में पुनः निर्वाचित हुए, जिसे सभी दलों ने सराहा।
भाषाई विविधता की मिसाल
दोनों सदनों में भारत की भाषाई शक्ति का प्रदर्शन हुआ। लोकसभा में 18 भारतीय भाषाओं में 181 बयान दिए गए, जबकि राज्यसभा में 12 क्षेत्रीय भाषाओं में 94 बार सदस्यों ने अपनी बात रखी। दोनों ही सदनों में ‘सिमल्टेनियस इंटरप्रिटेशन’ (एक साथ अनुवाद) की सुविधा ने इस संवाद को सुगम बनाया।
