तेल और गैस से भरे जहाजों की सुरक्षा के लिए भारतीय नौसेना ने अपने युद्धपोत तैनात किए

 तेल और गैस से भरे जहाजों की सुरक्षा के लिए भारतीय नौसेना ने अपने युद्धपोत तैनात किए
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अपने तेल और गैस की आपूर्ति की सुरक्षा के लिए कदम उठाए हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर भारत  आने वाले तेल और गैस से भरे जहाजों की सुरक्षा के लिए भारतीय नौसेना ने अपने युद्धपोत तैनात किए हैं। सूत्रों के अनुसार, दो नौसेना टास्क फोर्स इस क्षेत्र में सक्रिय हैं, जो इन व्यापारिक जहाजों और टैंकरों को रास्ते में एस्कॉर्ट कर रहे हैं और हर संभव मदद सुनिश्चित कर रहे हैं, ताकि वे सुरक्षित भारत तक पहुंच सकें।
रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान ने भारत से उन तीन टैंकरों की अदला-बदली की मांग की है जिन्हें उसने जब्त कर लिया था। इसके बदले ईरान ने भारत आने वाले जहाजों को सुरक्षित मार्ग देने की पेशकश की है। भारत ने पहले इन टैंकरों को पकड़ लिया था क्योंकि उन पर आरोप था कि उन्होंने अपनी पहचान छिपाई थी या बदल दी थी और वे समुद्र में अवैध जहाज-से-जहाज ट्रांसफर में शामिल थे। स्टेलर रूबी पर ईरानी झंडा लगा है, जबकि अन्य दो जहाजों पर निकारागुआ और माली के झंडे हैं।
ईरान ने मेडिकल उपकरण की भी मांगी
एक ईरानी अधिकारी के अनुसार, तेहरान ने कुछ दवाओं और मेडिकल उपकरणों की आपूर्ति की भी मांग की है। इस मुद्दे पर नई दिल्ली में ईरान के राजदूत ने भारतीय विदेश मंत्रालय के अधिकारियों से चर्चा की।
शिवालिक का कार्गो बर्थिंग सुविधा सुनिश्चित
नई दिल्ली में पश्चिम एशिया की स्थिति पर अंतर-मंत्रालयीय ब्रीफिंग में, बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि बंदरगाह पर दस्तावेजीकरण और प्राथमिकता के आधार पर बर्थिंग की व्यवस्था की गई है। इसका उद्देश्य ‘शिवालिक’ जहाज का कार्गो उतारने में किसी भी तरह की देरी को रोकना है।
MEA 24×7 हेल्पलाइन और नागरिकों के लिए मदद
विदेश मंत्रालय ने भारतीय नागरिकों और उनके परिवारों के सवालों के लिए स्पेशल कंट्रोल रूम चालू किया है। इसके अलावा राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ समन्वय जारी है। पूरे इलाके में भारतीय मिशन और पोस्ट 24×7 हेल्पलाइन चला रहे हैं और भारतीय समुदाय के संगठनों के साथ संपर्क बनाए हुए हैं।
MEA की मदद में वीजा संबंधी सहयोग, लॉजिस्टिक्स सहायता और आवाजाही में सहूलत शामिल है। इस इलाके में मौजूद भारतीय नाविकों की मदद के लिए पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के साथ भी समन्वय किया जा रहा है। 28 फरवरी 2026 से अब तक पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र से लगभग 2,20,000 भारतीय यात्री सुरक्षित रूप से भारत लौट चुके हैं ।