पश्चिम एशिया तनाव का असर देश के निर्यात पर इन सेक्टरों को बड़ा खतरा

 पश्चिम एशिया तनाव का असर देश के निर्यात पर इन सेक्टरों को बड़ा खतरा
नई दिल्ली। पश्चिम में चल रही भू-राजनीतिक अनिश्चिताएं बनी रहती हैं, यह फिर बढ़ती हैं तो भारत से निर्यात किए जाने वाली वस्तुओं और वहां से सीधे जुड़े सेक्टर पर बुरा असर पड़ेगा। रेटिंग्स एजेंसी क्रिसिल ने एक रिपोर्ट जारी कर बताया है कि, यदि मध्य पूर्व में चल रही भू-राजनीतिक अनिश्चिताएं बनी रहती हैं, तो बासमती चावल, डायमंड पॉलिशिंग, ट्रैवल ऑपरेटर और एयरलाइंस जैसे सेक्टर पर बुरा असर पड़ सकता है, क्योंकि इन सबका सीधा जुड़ाव इन क्षेत्रों से है। इसके अलावा सिरेमिक और फर्टिलाइजर जैसे सेक्टर जो निर्यात लिक्विफाइड नेचुर गैस (एलएनजी) पर अधिक निर्भर हैं, उनके उत्पादन पर जल्द असर पड़ सकता है। इसलिए इन क्षेत्रों में ध्यान देने की आवश्यकता होगी।
रिपोर्ट के अनुसार क्रूड से जुड़े सेक्टर जैसे कि डाउनस्ट्रीम आयल रिफाइनर, टायर, पेंट, स्पेशलिटी केमिकल, फ्लेक्सिबल पैकेजिंग और सिंथेटिक टेक्सटाइल पर भी असर पड़ सकता है। मध्य पूर्व के देशों में वैश्विक कच्चे तेल का 30 प्रतिशत और वैश्विक एलएनजी उत्पाद का 20 प्रतिशत हिस्सा है। इसका अधिकरतर हिस्सा होर्मुन स्ट्रेट के जरिए ट्रांसपोर्ट किया जाता है। भारत अपने कच्चे तेल का 85 प्रतिशत और एलएनजी की जरूरत का आधा हिस्सा आयात करता है। इसमें 40 प्रतिशत कच्चा तेल और 50 से 60 प्रतिशत एलएनजी होर्मुन जलडमरूमध्य से भेजा जाता है। अधिकतर शिपिंग जहाजों ने 1 मार्च 2026 से इस रास्ते पर चलना बंद कर दिया है, क्योंकि इस रास्ते पर खतरा बढ़ गया है और इस व्यापरिक रास्ते में किसी भी लंबे समय तक रुकावट का असर पूरे विश्व भर के कच्चे तेल और एलएनजी की उपलब्धता और उनकी कीमतों पर असर डालेगा।