डॉलर के मुकाबले रुपया और गिरा, सर्वकालिक निचले स्तर पर पहुंचा
- कारोबार दिल्ली राष्ट्रीय
Political Trust
- January 22, 2026
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नई दिल्ली। आज बुधवार को शुरुआती कारोबार में रुपया 31 पैसे टूटकर डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर 91.28 पर पहुंच गया। वैश्विक अनिश्चितता, व्यापार युद्ध की आशंकाओं और बढ़ते जोखिम से बचाव के रुख के कारण अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर दबाव बना हुआ है।
वैश्विक बाजारों में सतर्कता और डॉलर की मजबूत मांग के बीच बुधवार को शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले तेज गिरावट के साथ रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। रुपया 31 पैसे टूटकर डॉलर के मुकाबले 91.28 के स्तर पर आ गया।
फॉरेक्स कारोबारियों के अनुसार, बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितता और अमेरिका से मिल रहे विस्तारवादी संकेतों के चलते निवेशकों में जोखिम से बचने का रुख बढ़ा है। इसका दबाव उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर बना हुआ है, जिसमें भारतीय रुपया भी शामिल है।
मंगलवार को 90.97 अंक पर बंद हुआ
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में, रुपया 91.05 पर खुला और डॉलर के मुकाबले 91.28 पर कारोबार करते हुए कमजोर हुआ, जो पिछले बंद भाव से 31 पैसे कम है। मंगलवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 7 पैसे गिरकर रिकॉर्ड निचले स्तर 90.97 पर बंद हुआ।
रुपया हो रहा कमजोर?
जानकारों के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा व्यापार युद्ध की बयानबाजी को फिर से शुरू करने और ग्रीनलैंड पर अपना दबाव बढ़ाने से बाजार पहले से ही अस्थिर थे। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड चार महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई, जबकि डॉलर लगातार दूसरे दिन कमजोर हुआ। यह इस बात का संकेत है कि निवेशक न केवल जोखिम बल्कि दिशा पर भी सवाल उठा रहे हैं।
फॉरेक्स कारोबारियों के अनुसार, बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितता और अमेरिका से मिल रहे विस्तारवादी संकेतों के चलते निवेशकों में जोखिम से बचने का रुख बढ़ा है। इसका दबाव उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर बना हुआ है, जिसमें भारतीय रुपया भी शामिल है।
मंगलवार को 90.97 अंक पर बंद हुआ
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में, रुपया 91.05 पर खुला और डॉलर के मुकाबले 91.28 पर कारोबार करते हुए कमजोर हुआ, जो पिछले बंद भाव से 31 पैसे कम है। मंगलवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 7 पैसे गिरकर रिकॉर्ड निचले स्तर 90.97 पर बंद हुआ।
रुपया हो रहा कमजोर?
जानकारों के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा व्यापार युद्ध की बयानबाजी को फिर से शुरू करने और ग्रीनलैंड पर अपना दबाव बढ़ाने से बाजार पहले से ही अस्थिर थे। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड चार महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई, जबकि डॉलर लगातार दूसरे दिन कमजोर हुआ। यह इस बात का संकेत है कि निवेशक न केवल जोखिम बल्कि दिशा पर भी सवाल उठा रहे हैं।
