इन कारणों से महंगी हो रही चांदी, गहने नहीं अब उद्योग और ग्रीन एनर्जी की जरूरत बनी सफेद धातु

 इन कारणों से महंगी हो रही चांदी, गहने नहीं अब उद्योग और ग्रीन एनर्जी की जरूरत बनी सफेद धातु
नई दिल्ली। चांदी की महंगाई का कारण गहनों की मांग नहीं बल्कि उद्योग और ग्रीन एनर्जी है। आज चांदी उद्योग और हरित ऊर्जा के लिए जरूरी बन चुकी है। भारत फिलहाल रिफाइंड चांदी का बड़ा आयातक है और प्रोसेसिंग में पीछे है, जबकि चीन कच्ची चांदी आयात कर उसे प्रोसेस कर उच्च मूल्य वाले उत्पाद निर्यात करता है।
चांदी अब सिर्फ आभूषण या निवेश तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह उद्योग और ऊर्जा संक्रमण की एक रणनीतिक धातु बन चुकी है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अनुसार, भारत को चांदी को ‘कीमती धातु’ के नजरिये से देखने के बजाय इसे एक अहम औद्योगिक और ऊर्जा-संबंधी इनपुट मानकर नीति बनानी चाहिए। इसके लिए भारत को दीर्घकालिक विदेशी खनन आपूर्ति सुनिश्चित करने, घरेलू स्तर पर रिफाइनिंग और रीसाइक्लिंग क्षमता बढ़ाने, तैयार चांदी के आयात पर निर्भरता कम करने और आयात स्रोतों में विविधता लाने पर फोकस करना होगा।
चांदी प्रोसेसिंग में चीन का दबदबा
रिपोर्ट में कहा है कि वैश्विक स्तर पर चांदी की प्रोसेसिंग में चीन का दबदबा है। चीन दुनिया भर से चांदी के अयस्क और कंसन्ट्रेट्स का बड़ा हिस्सा आयात कर उन्हें घरेलू स्तर पर रिफाइन करता है और फिर इलेक्ट्रॉनिक्स, मेडिकल डिवाइस और सोलर पैनल जैसे उच्च मूल्य वाले उत्पादों के रूप में निर्यात करता है। इसके विपरीत, भारत बड़ी मात्रा में रिफाइंड चांदी आयात करता है। 2024 में भारत ने करीब 6.4 अरब डॉलर की रिफाइंड चांदी आयात की, जिससे वह दुनिया का सबसे बड़ा तैयार चांदी का उपभोक्ता बन गया, न कि प्रोसेसर।
भारत की आयात निर्भरता लगातार बढ़ रही
जीटीआरआई के मुताबिक, भारत की आयात निर्भरता लगातार बढ़ रही है। वित्त वर्ष 2025 में जहां चांदी उत्पादों का निर्यात 478.4 मिलियन डॉलर रहा, वहीं आयात 4.83 अरब डॉलर तक पहुंच गया। साल 2025 में यह निर्भरता और तेज हुई। अक्तूबर में अकेले 2.7 अरब डॉलर का आयात दर्ज किया गया, जो साल-दर-साल आधार पर 529 प्रतिशत की छलांग है। जनवरी से नवंबर 2025 के बीच कुल आयात 8.5 अरब डॉलर रहा और पूरे साल के लिए इसके 9.2 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।