मैथिली अकादमी में ताला लटका
नई दिल्ली –मैथिली साहित्य, सांस्कृतिक धरोहर, इतिहास एवं परंपरा विषय पर अनुसंधान हेतु मैथिली संस्थान की स्थापना सन् 1969 ई. में पटना, बिहार में हुई। इस पत्रिका के कुल पाँच अंक प्रकाशित हुए। सन् 1969 से 1977 के बीच प्रकाशित हुए इस कार्य में अन्य विद्वान एवं मिथिला के इतिहासकार, साहित्यकार, न्यायविद और पत्रकार शामिल थे।
इनमें मुख्य रूप से:
कुमार शुभेश्वर सिंह
जस्टिस सुशील कुमार झा
पत्रकार आर. एन. चौधरी (सुकन बाबू)
प्रो. उपेन्द्र ठाकुर
प्रो. जे. सी. झा
लक्ष्मण पति सिंह
इन विद्वानों के अपूर्व सहयोग से यह संस्था चल रही थी। इन लोगों के मृत्यु उपरांत इस संस्था का कार्य शिथिल होने लगा और मात्र विद्यापति पर्व समारोह मनाकर ही कार्य की पूर्ति होती थी।
अब पुनः कार्यकलाप को गति देने के लिए विद्वान समाज की सहायता अपेक्षित है। मैथिली भाषा की पहली शोध पत्रिका ‘मिथिला भारती’ का प्रकाशन इस संस्था द्वारा मिथिला संस्कृति एवं परंपरा के अनुसंधान के क्षेत्र में एक निष्काम कार्य है।
प्रो. (डॉ.) हेतुकुमार झा एवं प्रो. (डॉ.) रत्नेश्वर मिश्र के निर्देशन में और शिव कुमार मिश्र एवं भैरव लाल दास के सानिध्य में 2014 ई. में ‘मिथिला भारती’ का प्रकाशन पुनः शुरू हुआ। नए अंकों में मैथिली एवं अंग्रेजी भाषा में शोध-लेख प्रकाशित होते आ रहे हैं। इस पत्रिका को देश-विदेश में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त है और अंतरराष्ट्रीय भाषा के माध्यम से मैथिली संस्कृति का प्रचार-प्रसार दूर-दूर तक हो रहा है।
यह सौभाग्य का विषय है कि देश-विदेश के विद्वान लोग अपने शोध और आलेख से सहयोग दे रहे हैं। यह पत्रिका विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की शोध पत्रिका सूची UGC-CARE List में स्थान प्राप्त है। दिसम्बर 2024 तक इसके 11 भाग प्रकाशित हुए हैं।
वर्तमान संकट और अपील
इस संस्था को बिहार सरकार के कुछ वरिष्ठ लोगों द्वारा बंद करने की साजिश की जा रही है। अतः भाजपा के वरिष्ठ कार्यकर्ता पूर्व दरभंगा शहर महासचिव अजय कुमार झा, पूर्वी दरभंगा जिला उपाध्यक्ष सर्वण चौधरी, मैथिली परिषद अध्यक्ष शैलेन्द्र मिश्र, भाजपा कार्यकर्ता अभय झा और रमेश ठाकुर ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी, मुख्यमंत्री नितिश कुमार एवं गृह मंत्री अमित शाह जी से मांग की है कि:
मैथिली अकादमी को पुनः चालू किया जाए।
मिथिला और मैथिली भाषा को जीवंत किया जाए।
जिससे देश एवं विदेश में मैथिली भाषा का प्रचार-प्रसार हो और नए रोजगार का सृजन हो सके।
