पश्चिम एशिया में जारी तनाव का सीधा असर दुनिया भर की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं पर
- कारोबार दिल्ली राष्ट्रीय
Political Trust
- May 21, 2026
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नई दिल्ली। वैश्विक अनिश्चितताओं और पश्चिम एशिया में जारी तनाव का सीधा असर अब दुनिया भर की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के आर्थिक अनुमानों पर स्पष्ट रूप से पड़ने लगा है। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने हाल ही में वैश्विक आर्थिक झटकों का हवाला देते हुए वर्ष 2026 के लिए भारत की विकास दर (जीडीपी) के अनुमान को 6.6 प्रतिशत से घटाकर 6.4 प्रतिशत कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक मामलों के विभाग (यूएन डीईएसए) द्वारा मंगलवार को जारी की गई नवीनतम रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि विकास दर के इस अनुमानित संशोधन के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना रहेगा।
पश्चिम एशिया का संकट वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक नया झटका साबित हो रहा है, जिसने विकास की रफ्तार को धीमा करने के साथ-साथ महंगाई के दबाव को फिर से बढ़ा दिया है। वर्ष 2025 में दर्ज 7.5 प्रतिशत की विकास दर से 2026 में 6.4 प्रतिशत तक की यह गिरावट मुख्य रूप से ऊर्जा आयात की बढ़ती लागत और सख्त होती वित्तीय स्थितियों के दबाव को दर्शाती है। यूएन डीईएसए में आर्थिक विश्लेषण और नीति प्रभाग के प्रभारी व वरिष्ठ अर्थशास्त्री इंगो पीटरले ने स्पष्ट किया कि पश्चिम एशिया का यह झटका सभी देशों में विकास को कम कर रहा है और महंगाई बढ़ा रहा है, जिससे नीति निर्माताओं के लिए गुंजाइश सीमित हो रही है। वैश्विक स्तर पर भी हालात चिंताजनक हैं, जहां 2026 के लिए वैश्विक जीडीपी वृद्धि का अनुमान अब महज 2.5 प्रतिशत आंका गया है, जो जनवरी के अनुमान से 0.2 प्रतिशत अंक कम है और महामारी से पहले के सामान्य स्तर से काफी नीचे है।
