महाराष्ट्र निकाय चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी की जीत से राहुल-अखिलेश की टेंशन बढ़ी

 महाराष्ट्र निकाय चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी की जीत से राहुल-अखिलेश की टेंशन बढ़ी
नई दिल्ली। महाराष्ट्र निकाय चुनाव के नतीजों में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने बेहतर प्रदर्शन किया है। चुनावों में कुल 114 पार्षदों को जिताकर न सिर्फ ओवैसी ने अपनी ताकत दिखाई, बल्कि राज ठाकरे और शरद पवार से भी बेहतर प्रदर्शन कर सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एआईएमआईएम की यह बढ़त कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के लिए खतरे की घंटी है।
महाराष्ट्र निकाय चुनाव के नतीजों में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने शानदार प्रदर्शन किया है।
महाराष्ट्र की 29 महानगर पालिका चुनावों में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के शानदार प्रदर्शन ने सभी को हैरान कर दिया हैं इन नतीजों के साथ असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली पार्टी ने राज्य की राजनीति में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा दी है। इन चुनावों में कुल 114 पार्षदों को जिताकर न सिर्फ अपनी ताकत दिखाई, बल्कि महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) और एनसीपी (शरदचंद्र पवार गुट) से भी बेहतर प्रदर्शन कर सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। यह एआईएमआईएम का अब तक का सबसे बड़ा शहरी स्थानीय निकाय प्रदर्शन माना जा रहा है। महाराष्ट्र निकाय चुनाव नतीजों के फाइनल आंकड़ों मुताबिक, एआईएमआईएम को सबसे बड़ी सफलता छत्रपति संभाजीनगर में मिली, जहां पार्टी के 33 पार्षद विजयी हुए। इसके अलावा मालेगांव में 21, अमरावती में 11, नांदेड़ में 13, धुले में 10, मुंबई और सोलापुर में 8-8, ठाणे में 5, जलगांव में दो और परभणी में 1-1 पार्षद एआईएमआईएम के खाते में गए हैं। इन नतीजों ने साफ कर दिया है कि एआईएमआईएम अब केवल सीमित इलाकों की पार्टी नहीं रही, बल्कि उसने मराठवाड़ा, पश्चिमी महाराष्ट्र और मुंबई जैसे बड़े शहरी केंद्रों में भी अपनी पकड़ मजबूत कर ली है।
कांग्रेस की बढ़ी टेंशन?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एआईएमआईएम की यह बढ़त कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के लिए खतरे की घंटी है, खासकर अल्पसंख्यक वोट बैंक के लिहाज से। महाराष्ट्र में एआईएमआईएम ने कई जगह कांग्रेस और एनसीपी (शरद पवार गुट) के उम्मीदवारों को पीछे छोड़ दिया है। सोलापुर, धुले और मुंबई जैसे शहरों में पार्टी की मजबूत मौजूदगी ने यह संकेत दे दिया है कि आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले एआईएमआईएम राज्य की राजनीति में ‘किंगमेकर’ की भूमिका निभा सकती है। कई नगरपालिकाओं में, जहां किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है, वहां एआईएमआईएम की भूमिका निर्णायक हो सकती है।